सत्य का पारखी

Submitted by osho on शनि, 05/20/2017 - 09:07

मिश्र में एक अद्भुत फकीर हुआ है झुन्‍नून। एक युवक ने आकर उससे पूछा, मैं भी सत्‍संग का आकांक्षी हूं। मुझे भी चरणों में जगह दो। झुन्‍नून ने उसकी तरफ देखा—दिखाई पड़ी होगी वहीँ बुद्ध की कलछी वाली बात जो दाल में रहकर भी उसका स्‍वाद नहीं ले पाती। उसने कहा,तू एक काम कर। खीसे में से एक पत्‍थर निकाला और कहा, जा बाजार में, सब्‍जी मंडी में चला जा, और दुकानदारों से पूछना कि इसके कितने दाम मिल सकते है। 

सन्यास के तीन बुनयादी सूत्र

Submitted by osho on शनि, 05/20/2017 - 09:04

संन्यास के तीन बुनियादी सूत्र
संन्यास के तीन बुनियादी सूत्र खयाल में ले लेने जैसे हैं।
पहला—जीवन एक प्रवाह है। उसमें रुक नहीं जाना, ठहर नहीं जाना, वहां कहीं घर नहीं बना लेना है। एक यात्रा है जीवन। पड़ाव है बहुत, लेकिन मंजिल कहीं भी नहीं। मंजिल जीवन के पार परमात्मा में है।
दूसरा सूत्र—जीवन जो भी दे उसके साथ पूर्ण संतुइष्ट और पूर्ण अनुग्रह, क्योंकि जहां असंतुष्ट हुए हम तो जीवन जो देता है, उसे भी छीन लेता है और जहां संतुष्ट हुएहम कि जीवन जो नहीं देता, उसके भी द्वार खुल जाते हैं।

बरेली में ओशो ध्यान प्रयोग प्रत्येक शनिवार को

osho meditation in Bareilly

बरेली में  प्रत्येक शनिवार को  ओशो ध्यान प्रयोग का आयोजन किया जाता है जिसमे कोई भी समलित हो सकता है .| ओशो के द्वारा बताई गई विधियों का सही सही प्रयोग करते हुए अंतरतम की गहराई अनुभव करने के किये आपका स्वागत है | 

ध्यान का समय 4PM to 8 PM 

  • 4 to 5  ध्यान प्रयोग 

  • 5 to 6:30 ओशो प्रवचन
  • 6:30 to 8  ओशो सत्संग 

नोट : मित्रो आप अपनी सुविधा अनुसार किसी भी प्रयोग में समलित हो सकते है 

ध्यान स्थल 

FIZIKA MIND 
किप्स कालोनी
शास्त्री नगर
बरेली

देववाणी ध्यान

Submitted by osho on शनि, 07/23/2016 - 16:25

हर रात को सोने के पहले तुम एक छोटा सा प्रयोग कर सकते हो जो बहुत ही सहायक होगा। प्रकाश बुझा लो, सोने के लिए तैयार हो कर अपने बिस्तर पर बैठ जाओ--पंद्रह मिनट के लिए। आंखें बंद कर लो और फिर कोई निरर्थक एकसुरी आवाज निकालना शुरू करो। उदाहरण के लिए ल ल ल ल--और प्रतीक्षा करो कि मन तुम्हें नई ध्वनियां देता जाए। एक ही बात याद रखनी है कि वे आवाजें या शब्द उस किसी भाषा के न हों जो तुम जानते हो। यदि तुम अंग्रेजी, जर्मन और इटालियन भाषा जानते हो तो उच्चारित शब्द इन भाषाओं के न हों। कोई भी भाषा जो तुम नहीं जानते हो--जैसे मान लो तिब्बती, चीनी, जापानी--उनकी ध्वनियां तुम उच्चारित कर सकते हो। लेकिन यदि तुम जाप

अनहद नाद कृपया समझाएं

Submitted by osho on गुरु, 07/21/2016 - 18:07

अनहद नाद कृपया समझाएं कि अनाहत नाद एक प्रकार की ध्वनि है या कि वह समग्रत: निर्ध्‍वनि है। और यह भी बताने की कृपा करें कि समग्र ध्वनि और समय निध्र्वर्नि की अवस्थाएं समान कैसे हो सकती हैं?
अनाहत नाद कोई ध्वनि नहीं है। यह निर्ध्वनि है, यह मौन है। लेकिन यह मौन सुना जा सकता है। इसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है, क्योंकि तब यह तर्कसम्मत प्रश्न उठता है कि निर्ध्वनि कैसे सुनी जा सकती है!